Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.36: कर्मफल भोगने के लिए विधाता द्वारा नियुक्त देहधारी मनुष्य, धन, राज्य और कठोर तप के प्रभाव से प्रकृति का उल्लंघन नहीं कर सकते ॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न धनेन न राज्येन नोग्रेण तपसा तथा।
स्वभावमतिवर्तन्ते ये नियुक्ता: शरीरिण:॥ ३६॥
अनुवाद
कर्मफल भोगने के लिए विधाता द्वारा नियुक्त देहधारी मनुष्य, धन, राज्य और कठोर तप के प्रभाव से प्रकृति का उल्लंघन नहीं कर सकते ॥36॥
Incarnate human beings, appointed by the Creator to enjoy the fruits of their actions, cannot violate nature due to the influence of wealth, state and harsh penance. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥