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mahabharat 12.331.33: इस धरती पर जब हिरण, पक्षी, जंगली जानवर और गरीब लोग बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, तो उनका इलाज कौन करता है? लेकिन आमतौर पर उन्हें कोई बीमारी नहीं होती।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.331.33 
के वा भुवि चिकित्सन्ते रोगार्तान् मृगपक्षिण:।
श्वापदानि दरिद्रांश्च प्रायो नार्ता भवन्ति ते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इस धरती पर जब हिरण, पक्षी, जंगली जानवर और गरीब लोग बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, तो उनका इलाज कौन करता है? लेकिन आमतौर पर उन्हें कोई बीमारी नहीं होती।
 
On this earth, when deer, birds, wild animals and poor people are afflicted with diseases, who goes to treat them? But usually they do not get any disease.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)