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mahabharat 12.331.31: बहुत सी औषधियों का संग्रह करने वाले और चिकित्सा में निपुण चतुर वैद्य भी शिकारियों द्वारा मारे गए हिरणों की तरह रोगों का शिकार हो जाते हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.331.31 
ते चातिनिपुणा वैद्या: कुशला: सम्भृतौषधा:।
व्याधिभि: परिकृष्यन्ते मृगा व्याधैरिवार्दिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
बहुत सी औषधियों का संग्रह करने वाले और चिकित्सा में निपुण चतुर वैद्य भी शिकारियों द्वारा मारे गए हिरणों की तरह रोगों का शिकार हो जाते हैं ॥31॥
 
Even clever doctors who have collected many medicines and are adept in medicine, fall prey to diseases like deer killed by hunters. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)