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mahabharat 12.331.3: शारीरिक और मानसिक रोग शरीर को उसी प्रकार पीड़ा देते हैं जैसे मजबूत धनुषधारी वीर पुरुष तीखे बाण छोड़ते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.331.3 
रुजन्ति हि शरीराणि रोगा: शारीरमानसा:।
सायका इव तीक्ष्णाग्रा: प्रयुक्ता दृढधन्विभि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
शारीरिक और मानसिक रोग शरीर को उसी प्रकार पीड़ा देते हैं जैसे मजबूत धनुषधारी वीर पुरुष तीखे बाण छोड़ते हैं।
 
Physical and mental diseases torment the body like sharp arrows shot by brave men holding strong bows. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)