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mahabharat 12.331.27: कोई इस योनि सम्बन्ध से सुरक्षित और जीवित बाहर आ जाता है, तो कोई बच्चा प्राप्त कर पुनः आपसी सम्बन्ध में बंध जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.331.27 
एतस्माद् योनिसम्बन्धाद् यो जीवन् परिमुच्यते।
प्रजां च लभते काञ्चित् पुनर्द्वन्द्वेषु सज्जति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कोई इस योनि सम्बन्ध से सुरक्षित और जीवित बाहर आ जाता है, तो कोई बच्चा प्राप्त कर पुनः आपसी सम्बन्ध में बंध जाता है।
 
Someone comes out of this vaginal relationship safely and alive, then someone gets a child and again gets involved in mutual relationship.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)