Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.25-26: गर्भ में मल-मूत्र को रोकने और निकालने की स्वाभाविक क्रिया होती है; परन्तु कोई स्वतंत्र कर्ता नहीं है। कुछ भ्रूण माता के गर्भ से गिर जाते हैं, कुछ जन्म लेते हैं और कुछ जन्म के बाद मर जाते हैं॥ 25-26॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गर्भे मूत्रपुरीषाणां स्वभावनियता गति:।
धारणे वा विसर्गे वा न कर्ता विद्यते वश:॥ २५॥
स्रवन्ति ह्युदराद् गर्भा जायमानास्तथा परे।
आगमेन तथान्येषां विनाश उपपद्यते॥ २६॥
अनुवाद
गर्भ में मल-मूत्र को रोकने और निकालने की स्वाभाविक क्रिया होती है; परन्तु कोई स्वतंत्र कर्ता नहीं है। कुछ भ्रूण माता के गर्भ से गिर जाते हैं, कुछ जन्म लेते हैं और कुछ जन्म के बाद मर जाते हैं॥ 25-26॥
There is a natural movement in the womb in retaining or excreting faeces and urine; but there is no independent doer. Some foetuses fall from the mother's womb, some are born and some die after being born.॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥