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mahabharat 12.331.17: बहुत से लोग सन्तान प्राप्ति से वैसे ही डरते हैं जैसे क्रोधी विषैले सर्प से डरते हैं। फिर भी उनका दीर्घायु पुत्र होता है, जो किसी रोग आदि से कभी मृत के समान नहीं होता। ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.331.17 
गर्भाच्चोद्विजमानानां क्रुद्धादाशीविषादिव।
आयुष्मान् जायते पुत्र: कथं प्रेत इवाभवत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग सन्तान प्राप्ति से वैसे ही डरते हैं जैसे क्रोधी विषैले सर्प से डरते हैं। फिर भी उनका दीर्घायु पुत्र होता है, जो किसी रोग आदि से कभी मृत के समान नहीं होता। ॥17॥
 
Many people are afraid of having a child, just as people are afraid of an angry, poisonous snake. However, they have a long-lived son who never becomes like a dead person due to any disease or the like. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)