Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.16: कुछ लोग पुत्र की कामना करते हैं और चाहते हैं कि उस पुत्र से भी संतान हो और इसके लिए वे हर संभव प्रयास करते हैं, परन्तु फिर भी उन्हें एक भी अंडा नहीं मिलता ॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केषाञ्चित् पुत्रकामानामनुसंतानमिच्छताम्।
सिद्धौ प्रयतमानानां न चाण्डमुपजायते॥ १६॥
अनुवाद
कुछ लोग पुत्र की कामना करते हैं और चाहते हैं कि उस पुत्र से भी संतान हो और इसके लिए वे हर संभव प्रयास करते हैं, परन्तु फिर भी उन्हें एक भी अंडा नहीं मिलता ॥16॥
Some people desire a son and want that son to have children too and make every effort to achieve this, but still they do not produce even a single egg. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥