Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.331.1: नारद जी कहते हैं - शुकदेव! जब मनुष्य सुख को दुःख और दुःख को सुख समझने लगता है, तब बुद्धि, नीति और पुरुषार्थ भी उसकी रक्षा नहीं कर सकते। | mahabharat अध्याय 12.331: नारदजीका शुकदेवको कर्मफल-प्राप्तिमें परतन्त्रताविषयक उपदेश तथा शुकदेवजीका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारद जी कहते हैं - शुकदेव! जब मनुष्य सुख को दुःख और दुःख को सुख समझने लगता है, तब बुद्धि, नीति और पुरुषार्थ भी उसकी रक्षा नहीं कर सकते।
Narada ji says - Shukdev! When a man starts considering happiness as sorrow and sorrow as happiness, then even wisdom, good policy and efforts cannot protect him. 1.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥