श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 329: शुकदेवजीको नारदजीका वैराग्य और ज्ञानका उपदेश  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.329.59 
संयमेन नवं बन्धं निवर्त्य तपसो बलात्।
सम्प्राप्ता बहव: सिद्धिमप्यबाधां सुखोदयाम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
बहुत से बुद्धिमान पुरुषों ने संयम और तप के बल से नए बंधनों को तोड़कर शाश्वत सुख देने वाली अबाधित सिद्धि (शक्ति) प्राप्त कर ली है ॥59॥
 
Many wise men, by the power of self-restraint and austerity, have broken the new bonds and attained the unhindered siddhi (power) that gives eternal happiness. ॥ 59॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि एकोनत्रिंशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें तीन सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)