श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.327.3 
एतस्मिन्नेव काले तु देवर्षिर्नारदस्तथा।
हिमवन्तमियाद् द्रष्टुं सिद्धचारणसेवितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस समय ऋषि देव नारद सिद्धों और चारणों द्वारा सेवित हिमालय पर्वत पर उनसे मिलने आये।
 
At this time the sage Deva Narada came to see him on the Himalaya mountains served by the Siddhas and the Charanas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)