श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 327: शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि बताना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  12.327.12-13 
तच्छ्रुत्वा व्यथिता लोका: क इमामुद्धरेदिति।
अथ देवगणं सर्वं सम्भ्रान्तेन्द्रियमानसम्॥ १२॥
अपश्यद् भगवान् विष्णु: क्षिप्तं सासुरराक्षसम्।
किं त्वत्र सुकृतं कार्यं भवेदिति विचिन्तयन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसकी यह तिरस्कारपूर्ण घोषणा सुनकर सब लोग व्याकुल हो गए और मन-ही-मन सोचने लगे कि ‘कौन वीर पुरुष इस शक्ति को उखाड़ सकता है?’ उस समय भगवान विष्णु ने देखा कि सब देवताओं की इन्द्रियाँ और मन भय से व्याकुल हो रहे हैं और दैत्यों तथा राक्षसों सहित सम्पूर्ण जगत पर स्कन्द ने आक्रमण कर दिया है। यह देखकर वे सोचने लगे कि यहाँ क्या करना श्रेयस्कर होगा?॥12-13॥
 
Hearing his scornful declaration, everyone became distressed and began to think in their hearts, 'Which brave man can uproot this power?' At that time Lord Vishnu saw that the senses and minds of all the gods were agitated with fear and the entire world including the demons and monsters had been attacked by Skanda. Seeing this, he began to think what would be the best thing to do here?॥12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)