Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.325.7: हे मनुष्यों के स्वामी! पिता की आज्ञा पाकर शुकदेवजी धर्मनिष्ठा और मोक्षरूपी परम आश्रय की जिज्ञासा करने के लिए मिथिला की ओर चल पड़े। | mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! पिता की आज्ञा पाकर शुकदेवजी धर्मनिष्ठा और मोक्षरूपी परम आश्रय की जिज्ञासा करने के लिए मिथिला की ओर चल पड़े।
Lord of men! After receiving the permission of his father, Shukdevji started towards Mithila to inquire about the devotion to religion and the ultimate refuge of salvation. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥