Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.325.11: मेरे आश्रयदाता राजा जनक धर्म में पारंगत हैं और मोक्ष-शास्त्रों के ज्ञाता हैं। वे तुम्हें जो भी आदेश दें, उसका तुम निःसंदेह पालन करो।॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.325: पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और वहाँ उनका द्वारपाल, मन्त्री और युवती स्त्रियोंके द्वारा सत्कृत होनेके उपरान्त ध्यानमें स्थित हो जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स धर्मकुशलो राजा मोक्षशास्त्रविशारद:।
याज्यो मम स यद् ब्रूयात् तत् कार्यमविशङ्कया॥ ११॥
अनुवाद
मेरे आश्रयदाता राजा जनक धर्म में पारंगत हैं और मोक्ष-शास्त्रों के ज्ञाता हैं। वे तुम्हें जो भी आदेश दें, उसका तुम निःसंदेह पालन करो।॥11॥
'My patron King Janaka is well versed in Dharma and is well versed in the scriptures of salvation. Whatever orders he gives you, follow them without any doubt.'॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥