| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति » श्लोक 6 |
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| | | | श्लोक 12.323.6  | भीष्म उवाच
न हायनैर्न पलितैर्न वित्तैर्न च बन्धुभि:।
ऋषयश्चक्रिरे धर्मं योऽनूचान: स नो महान्॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्म बोले, "हे राजन! वृद्ध हो जाने से, केशों के पक जाने से, अधिक धन-संपत्ति हो जाने से अथवा बन्धु-बान्धवों की संख्या बढ़ जाने से कोई महान नहीं हो जाता। ऋषियों ने यह नियम बनाया है कि जो हम लोगों में वेदों का प्रचार करने में समर्थ होगा, वही महान माना जाएगा।" | | | | Bhishma said, "O King! No one becomes great by growing old, by having grey hair, by having more wealth or by having an increase in the number of relatives. The sages have made a rule that whoever is able to preach the Vedas among us will be considered great." 6. | | ✨ ai-generated | | |
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