श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.323.28 
यथा ह्यग्निर्यथा वायुर्यथा भूमिर्यथा जलम्।
यथा च खं तथा शुद्धो भविता ते सुतो महान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे अग्नि, वायु, पृथ्वी, जल और आकाश पवित्र हैं, वैसे ही तुम्हारा पुत्र भी पवित्र और महान होगा।॥28॥
 
‘Just like the fire, the air, the earth, the water and the sky are pure, your son too will be as pure and great.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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