श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.323.27 
उवाच चैवं भगवांस्त्र्यम्बक: प्रहसन्निव।
एवंविधस्ते तनयो द्वैपायन भविष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव व्यास के समक्ष प्रकट हुए और मुस्कुराते हुए बोले, 'द्वैपायन! तुम्हें वैसा ही पुत्र मिलेगा जैसा तुम चाहते हो।'
 
Lord Shiva appeared before Vyasa and smilingly said, 'Dwaipayana! You will get a son just like the one you want.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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