श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 323: व्यासजीकी पुत्रप्राप्तिके लिये तपस्या और भगवान् शंकरसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.323.2 
कस्यां चोत्पादयामास शुकं व्यासस्तपोधन:।
न ह्यस्य जननीं विद्म जन्म चाग्रॺं महात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी व्यासजी ने किस स्त्री के गर्भ से शुकदेवजी को जन्म दिया? महात्मा शुकदेवजी की माता का नाम हम नहीं जानते और उनके उत्तम जन्म की कथा भी हमें ज्ञात नहीं है॥2॥
 
From the womb of which woman did Vyasji, who was rich in penance, give birth to Shukdevji? We do not know the name of the mother of Mahatma Shukdevji and we do not even know the story of his noble birth. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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