श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.320.54 
सौकुमार्यं तथा रूपं वपुरग्रॺं तथा वय:।
तवैतानि समस्तानि नियमश्चेति संशय:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कोमलता, सुन्दरता, मनोहर शरीर और यौवन - ये सब योग के विरुद्ध हैं; फिर भी योग और नियम के साथ ये सब गुण आपमें कैसे हैं? यही मेरे मन में संदेह है ॥54॥
 
Tenderness, beauty, charming body and youthfulness - all these things are against Yoga; yet how is it possible that you have all these qualities along with Yoga and Niyama? This is the doubt in my mind. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)