श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.320.32 
यथा क्षेत्रं मृदूभूतमद्भिराप्लावितं तथा।
जनयत्यङ्कुरं कर्म नृणां तद्वत् पुनर्भवम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जैसे समय पर जोते, मुलायम और सींचे हुए खेत में बोए गए बीजों के अंकुर उत्पन्न होते हैं, वैसे ही मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्म पुनर्जन्म को जन्म देते हैं ॥ 32॥
 
Just as a field which has been ploughed and made soft and irrigated in due course gives rise to the sprouts of the seeds sown, similarly the good and bad deeds of human beings give rise to rebirth. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)