श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  12.320.174 
तदेवमनुसंदृश्य वाच्यावाच्यं परीक्षता।
स्त्रीपुंसो: समवायोऽयं त्वया वाच्यो न संसदि॥ १७४॥
 
 
अनुवाद
अतः इस प्रकार विचार करके यह देखना आवश्यक है कि यहाँ क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। इस सभा में स्त्री-पुरुष के मिलन की चर्चा कदापि न करनी चाहिए। 174।
 
Therefore, after thinking in this manner, it is necessary to examine what should be said here and what should not be said. You should never discuss the union of men and women in this gathering. 174.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)