श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 320: राजा जनककी परीक्षा करनेके लिये आयी हुई सुलभाका उनके शरीरमें प्रवेश करना, राजा जनकका उसपर दोषारोपण करना एवं सुलभाका युक्तियोंद्वारा निराकरण करते हुए राजा जनकको अज्ञानी बताना  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  12.320.159 
सप्ताङ्गश्चैव संघातस्त्रयश्चान्ये नृपोत्तम।
सम्भूय दशवर्गोऽयं भुङ्‍क्ते राज्यं हि राजवत्॥ १५९॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! पूर्वोक्त सात इन्द्रियाँ और अन्य तीन शक्तियाँ (प्रभु-शक्ति, उत्साह-शक्ति और मन्त्र-शक्ति) मिलकर राज्य के दस खण्ड हैं। ये दस खण्ड मिलकर राजा के समान राज्य का उपभोग करते हैं॥159॥
 
O best of kings! The aforesaid seven organs and the three other powers (Prabhu-Shakti, Utsah-Shakti and Mantra-Shakti) together form the ten sections of the kingdom. These ten sections together enjoy the kingdom like a king.॥ 159॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)