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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 319: जरा-मृत्युका उल्लंघन करनेके विषयमें पञ्चशिख और राजा जनकका संवाद
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श्लोक 13
श्लोक
12.319.13
एवं भूतेषु भूतात्मा नित्यभूतोऽध्रुवेषु च।
कथं हि हृष्येज्जातेषु मृतेषु च कथं ज्वरेत्॥ १३॥
अनुवाद
जब सभी प्राणी नाशवान हैं, तो सनातन आत्मा उनके जन्म लेने पर क्यों प्रसन्न और मरने पर क्यों शोक करे? ॥13॥
When all creatures are destructible, why should the eternal soul rejoice at being born and grieve at their death? ॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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