यो घृतार्थी खरीक्षीरं मथेद् गन्धर्वसत्तम।
विष्ठां तत्रानुपश्येत न मण्डं न च वै घृतम्॥ ५१॥
अनुवाद
हे गंधर्व शिरोमणे! जो मनुष्य घी की इच्छा से गधे का दूध मथता है, उसे वहाँ केवल मल ही मिलता है। उसे वहाँ न तो मक्खन मिलता है और न ही घी ॥51॥
Gandharva Shiromane! One who churns the milk of a donkey with the desire to obtain ghee, finds only feces there. He neither gets butter nor ghee there. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥