श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 315: प्रकृति-पुरुषका विवेक और उसका फल  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.315.8 
कर्तृत्वात् प्रकृतीनां च तथा प्रकृतिधर्मिता॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह अपने अन्दर नाना प्रकार की प्रकृतियों को स्वीकार करके प्रकृति पुरुष बन जाता है ॥8॥
 
By accepting various natures within himself, he becomes a person of nature. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)