Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.315.7: क्योंकि वह स्वयं को जगत् का रचयिता मानता है, इसलिए उसे सर्गधर्मा कहते हैं और क्योंकि वह स्वयं को योग का रचयिता मानता है, इसलिए उसे योगधर्मा कहते हैं ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.315: प्रकृति-पुरुषका विवेक और उसका फल । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्योंकि वह स्वयं को जगत् का रचयिता मानता है, इसलिए उसे सर्गधर्मा कहते हैं और क्योंकि वह स्वयं को योग का रचयिता मानता है, इसलिए उसे योगधर्मा कहते हैं ॥7॥
Because he considers himself the creator of the universe, he is called Sargadharma and because he considers himself the creator of Yoga, he is called Yogadharma. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥