श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.314.6-7 
सत्त्वस्य तु रजो दृष्टं रजसश्च तमस्तथा॥ ६॥
तमसश्च तथा सत्त्वं सत्त्वस्याव्यक्तमेव च।
अव्यक्त: सत्त्वसंयुक्तो देवलोकमवाप्नुयात्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
रजोगुण के साथ सत्त्वगुण, तमोगुण के साथ रजोगुण, सत्त्वगुण के साथ तमोगुण और अव्यक्त (जीवात्मा) के साथ सत्त्वगुण का सम्मिश्रण देखा जाता है (दो तत्त्वों का यह संयोग या संयोजन द्वैत है)। जब जीवात्मा सत्त्वगुण से युक्त हो जाता है, तब वह देवलोक को प्राप्त होता है। 6-7॥
 
A mixture of Rajogun with Sattvagun, Tamogun with Rajogun, Sattvagun with Tamogun and Avyakt (jivatma) with Sattvagun is seen (this combination or combination of two elements is a duality). When the soul is united with Sattva Guna, then it reaches the world of gods. 6-7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas