| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न » श्लोक 4-5h |
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| | | | श्लोक 12.314.4-5h  | केवलेनेह पुण्येन गतिमूर्ध्वामवाप्नुयात्॥ ४॥
पुण्यपापेन मानुष्यमधर्मेणाप्यधोगतिम्। | | | | | | अनुवाद | | शुभ कर्म करने से ही मनुष्य ऊर्ध्व लोक की यात्रा करता है, शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के कर्म करने से मृत्युलोक में जन्म लेता है और पाप कर्म करने से ही उसे अधो लोक में गिरना पड़ता है । 4 1/2॥ | | | | Only by doing good deeds, a person travels to the upper world, by performing both good and bad deeds, he takes birth in the mortal world and only by doing sinful acts, he has to fall into the lower world. 4 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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