vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न
»
श्लोक 2-3h
श्लोक
12.314.2-3h
अव्यक्तरूपो भगवान् शतधा च सहस्रधा।
शतधा सहस्रधा चैव तथा शतसहस्रधा॥ २॥
कोटिशश्च करोत्येष प्रत्यगात्मानमात्मना।
अनुवाद
यह तेजस्वी प्रकृति अपने प्रभाव से जीवों को सैकड़ों, हजारों, लाखों और करोड़ों रूपों में प्रकट करती है।
This glorious Nature, by its own influence, makes the living beings appear in hundreds, thousands, lakhs and crores of forms. 2 1/2.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas