श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.314.16 
अस्तित्वं केवलत्वं च विनाभावं तथैव च।
दैवतानि च मे ब्रूहि देहं यान्याश्रितानि वै॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कृपया मुझे मनुष्य का अस्तित्व, उसका व्यक्तित्व और प्रकृति से पृथक अस्तित्व समझाएँ तथा शरीर का आश्रय लेने वाले देवताओं का भी सार समझाएँ ॥16॥
 
Please explain to me the existence of man, his individuality and existence separate from nature and also explain to me the essence of the gods who take shelter of the body. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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