श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.314.14 
अग्राह्यावृषिशार्दूल कथमेको ह्यचेतन:।
चेतनावांस्तथा चैक: क्षेत्रज्ञ इति भाषित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे मुनि! ये दोनों ही बुद्धि से अदृश्य हैं। फिर आपने इन दोनों प्रकृतियों में से एक को अचेतन क्यों कहा है? और दूसरी को चेतन और क्षेत्रज्ञ कैसे कहा है?॥14॥
 
Great sage! Both of them are invisible to the intellect. Then why have you called one of these two natures unconscious? And how have you called the other one conscious and knower of the field?॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas