श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.314.13 
जनक उवाच
अनादिनिधनावेतावुभावेव महामते।
अमूर्तिमन्तावचलावप्रकम्प्यगुणागुणौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जनक ने पूछा- हे महात्मन! प्रकृति और पुरुष दोनों अनादि-अंत, निराकार और अचल हैं। दोनों अपने-अपने गुणों में स्थिर हैं और दोनों ही निर्गुण हैं।
 
Janaka asked- O great man! Both nature and man are without beginning or end, formless and immovable. Both are stable in their respective qualities and both are Nirguna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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