Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.314.1: याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - पुरुषप्रवर! सत्व, रज और तम - ये प्रकृति के तीन गुण हैं, जो सम्पूर्ण जगत में सदैव विद्यमान रहते हैं। उनसे कभी अलग न होओ। 1॥ | mahabharat अध्याय 12.314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - पुरुषप्रवर! सत्व, रज और तम - ये प्रकृति के तीन गुण हैं, जो सम्पूर्ण जगत में सदैव विद्यमान रहते हैं। उनसे कभी अलग न होओ। 1॥
Yajnavalkyaji says – Purushpravara! Sattva, Raja and Tama – these are the three qualities of nature, which are always present in the entire universe. Never get separated from him. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥