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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 312: संहारक्रमका वर्णन
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श्लोक 6
श्लोक
12.312.6
एतदुन्मेषमात्रेण विनष्टं स्थाणु जङ्गमम्।
कूर्मपृष्ठसमा भूमिर्भवत्यथ समन्तत:॥ ६॥
अनुवाद
पलक झपकते ही समस्त जड़-चेतन जगत नष्ट हो जाता है और यह पृथ्वी सब ओर से कछुए की पीठ के समान दिखाई देती है ॥6॥
In the blink of an eye the entire animate and inanimate world is destroyed and this earth appears like the back of a tortoise from all sides. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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