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mahabharat 12.312.17: राजेन्द्र! इस प्रकार मैंने तुम्हारे समक्ष संहारक्रम का यथावत् वर्णन किया है। अब तुम अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैव का वर्णन सुनो। 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.312: संहारक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 312: संहारक्रमका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.312.17 
एषोऽप्ययस्ते राजेन्द्र यथावत् समुदाहृत:।
अध्यात्ममधिभूतं च अधिदैवं च श्रूयताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इस प्रकार मैंने तुम्हारे समक्ष संहारक्रम का यथावत् वर्णन किया है। अब तुम अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैव का वर्णन सुनो। 17॥
 
Rajendra! In this way I have described the sequence of carnage before you exactly. Now you listen to the description of spirituality, Adhibhuta and Adhidaiva. 17॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि याज्ञवल्क्यजनकसंवादे द्वादशाधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३१२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें याज्ञवल्क्य और जनकका संवादविषयक तीन सौ बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)