श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 312: संहारक्रमका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.312.1 
याज्ञवल्क्य उवाच
तत्त्वानां सर्वसंख्या च कालसंख्या तथैव च।
मया प्रोक्ताऽऽनुपूर्व्येण संहारमपि मे शृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - राजन्! अब मुझसे क्रमशः तत्त्वों की कुल संख्या, काल की संख्या और तत्त्वों के नाश के विषय में कहिए। 1॥
 
Yajnavalkyaji says – King! Now listen to me talking about the total number of elements, the number of times and the destruction of the elements respectively. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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