Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.311.4: वे महामुनि प्रजापति ब्रह्मा उस स्वर्ण अण्डे के अन्दर एक वर्ष तक रहे और फिर उससे बाहर निकल आए। फिर वे सम्पूर्ण पृथ्वी, आकाश और ऊर्ध्वलोक (स्वर्ग) की रचना के विषय में सोचने लगे॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संवत्सरमुषित्वाण्डे निष्क्रम्य च महामुनि:।
संदधे स महीं कृत्स्नां दिवमूर्ध्वं प्रजापति:॥ ४॥
अनुवाद
वे महामुनि प्रजापति ब्रह्मा उस स्वर्ण अण्डे के अन्दर एक वर्ष तक रहे और फिर उससे बाहर निकल आए। फिर वे सम्पूर्ण पृथ्वी, आकाश और ऊर्ध्वलोक (स्वर्ग) की रचना के विषय में सोचने लगे॥4॥
That great sage Prajapati Brahma lived inside that golden egg for a year and came out of it. Then he started thinking about the creation of the entire earth, sky and upper world (heaven). 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥