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mahabharat 12.311.15-16h: ऐसे विषय-भोगी प्राणी स्वर्गलोक में प्रवेश करते हैं और इस लोक में विचरण करते रहते हैं। इन विषयों आदि का एक दिन तीन हजार कल्पों का कहा गया है। नरेश्वर! इनकी रात्रि भी उतनी ही बड़ी है। मन में दिन और रात्रि का परिमाण भी एक ही है। 15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  12.311.15-16h 
इहैव परिवर्तन्ते तिर्यग्योनिप्रवेशिन:।
त्रीणि कल्पसहस्राणि एतेषामहरुच्यते॥ १५॥
रात्रिरेतावती चैव मनसश्च नराधिप।
 
 
अनुवाद
ऐसे विषय-भोगी प्राणी स्वर्गलोक में प्रवेश करते हैं और इस लोक में विचरण करते रहते हैं। इन विषयों आदि का एक दिन तीन हजार कल्पों का कहा गया है। नरेश्वर! इनकी रात्रि भी उतनी ही बड़ी है। मन में दिन और रात्रि का परिमाण भी एक ही है। 15 1/2॥
 
Such sensual beings enter the heavenly bodies and keep roaming in this world. One day of these subjects etc. is said to be three thousand Kalpas. Nareshwar! Their night is also equally big. The magnitude of day and night in the mind is also the same. 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)