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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण
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श्लोक 3
श्लोक
12.310.3
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि इतिहासं पुरातनम्।
याज्ञवल्क्यस्य संवादं जनकस्य च भारत॥ ३॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले- भरतनन्दन! इस विषय में मैं आपको जनक और याज्ञवल्क्य के संवाद के रूप में एक प्राचीन कथा सुनाता हूँ॥3॥
Bhishmaji said-Bharatanandan! In this matter I will narrate to you an ancient story in the form of a conversation between Janaka and Yagyavalkya.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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