श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.310.22 
अध: श्रोत्रेन्द्रियग्राम उत्पद्यति नराधिप।
सप्तमं सर्गमित्याहुरेतदैन्द्रियकं स्मृतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! श्रोत्र आदि इन्द्रियों के पश्चात् कर्मेन्द्रियाँ उत्पन्न होती हैं। इसे सातवाँ स्कन्ध कहते हैं। इसे इन्द्रिय-सृष्टि भी कहते हैं। 22॥
 
Narendra! After the senses like hearing etc., the organs of action arise. This is called the seventh canto. This is also called sensory creation. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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