श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.310.16 
अव्यक्ताच्च महानात्मा समुत्पद्यति पार्थिव।
प्रथमं सर्गमित्येतदाहु: प्राधानिकं बुधा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! अव्यक्त प्रकृति से महातत्त्व (व्यापक बुद्धि) उत्पन्न होता है। विद्वान् इसे ही प्रथम मानवी एवं प्राकृतिक सृष्टि कहते हैं। 16॥
 
Prithvinath! Mahatattva (comprehensive intelligence) originates from the unmanifested nature. Scholars call this the first human and natural creation. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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