श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.310.14 
एते विशेषा राजेन्द्र महाभूतेषु पञ्चसु।
बुद्धीन्द्रियाण्यथैतानि सविशेषाणि मैथिल॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इनमें पाँच कर्मेन्द्रियाँ और शब्द आदि पाँच विषयों की 'विशेष' संज्ञा होती है और ये पाँचों इन्द्रियाँ 'विशेष' कहलाती हैं। मिथिलानरेश! ये 'विशेष' और 'सविशेष' तत्त्व पंचमहाभूतों में ही विद्यमान रहते हैं। 14॥
 
Rajendra! Among them, five senses of action and five subjects like words etc. have 'special' nouns and these five sense organs are called 'special'. King of Mithilana! These ‘Vishesh’ and ‘Savishesh’ elements are present in the Panchmahabhutas only. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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