| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण » श्लोक 10-11 |
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| | | | श्लोक 12.310.10-11  | अष्टौ प्रकृतय: प्रोक्ता विकाराश्चापि षोडश।
तत्र तु प्रकृतीरष्टौ प्राहुरध्यात्मचिन्तका:॥ १०॥
अव्यक्तं च महान्तं च तथाहङ्कार एव च।
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | प्रकृतियाँ आठ और विकार सोलह बताये गये हैं। अध्यात्मशास्त्र का चिंतन करने वाले विद्वान आठ प्रकृतियों के नाम इस प्रकार बताते हैं - अव्यक्त (मूल प्रकृति), महत्तत्त्व, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी। 10-11॥ | | | | The natures have been described as eight and their disorders as sixteen. Scholars who contemplate on spiritual science explain the names of eight natures in the following manner – Avyakt (original nature), Mahatattva, ego, sky, air, fire, water and earth. 10-11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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