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mahabharat 12.31.33: बाघ ने काँपते हुए राजकुमार को वहीं पटक दिया और कुचल दिया। वह बेजान होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। यह देखकर नर्स चीख पड़ी।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.31.33 
स बालस्तेन निष्पिष्टो वेपमानो नृपात्मज:।
व्यसु: पपात मेदिन्यां ततो धात्री विचुक्रुशे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
बाघ ने काँपते हुए राजकुमार को वहीं पटक दिया और कुचल दिया। वह बेजान होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। यह देखकर नर्स चीख पड़ी।
 
The tiger threw the trembling prince there and crushed him. He fell lifeless on the ground. Seeing this the nurse screamed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)