श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.31.2 
एवमुक्तस्तु स मुनिर्धर्मराजेन नारद:।
आचचक्षे यथावृत्तं सुवर्णष्ठीविनं प्रति॥ २॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज की यह बात सुनकर नारद मुनि ने सुवर्णष्ठीवी के जन्म का यथार्थ वृत्तांत कहना आरम्भ किया॥2॥
 
On hearing this from Dharmaraja, Narada Muni started narrating the true story of Suvarnasthivi's birth. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)