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सृंजय उवाच
प्रीतौ भवन्तौ यदि मे कृतमेतावता मम।
एष एव परो लाभो निर्वृत्तो मे महाफल:॥ १३॥
अनुवाद
सृंजय ने कहा, "ब्राह्मण! यदि आप दोनों प्रसन्न हैं, तो मुझे इससे संतोष है। यह हमारे लिए महान् फलदायी और परम लाभ देने वाला सिद्ध हुआ है।"
Srinjaya said, "Brahmin! If you both are happy, then I am satisfied with this. This has proved to be a great fruitful and ultimate benefit for us." 13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥