श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.309.3 
भगवन् किमिदं श्रेय: प्रेत्य चापीह वा भवेत्।
पुरुषस्याध्रुवे देहे कामस्य वशवर्तिन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इस क्षणिक शरीर में काम के वश में रहने वाला मनुष्य इस लोक और परलोक में किस प्रकार बच सकता है?॥3॥
 
'O Lord! By what means can a man who lives under the influence of lust in this temporary body be saved in this world and the next?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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