Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.37: हे राजन! यदि आप व्रत और नियमों का पालन न करने वाले पुरुष को रत्नों से युक्त सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य भी दे दें, तो भी आपको उसे यह ज्ञान नहीं देना चाहिए। किन्तु जो पुरुष अपनी इन्द्रियों को वश में कर चुका है, उसे यह परम ज्ञान अवश्य उपदेश करना चाहिए। ॥37॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वीमिमां यद्यपि रत्नपूर्णां
दद्यान्न देयं त्विदमव्रताय।
जितेन्द्रियायैतदसंशयं ते
भवेत् प्रदेयं परमं नरेन्द्र॥ ३७॥
अनुवाद
हे राजन! यदि आप व्रत और नियमों का पालन न करने वाले पुरुष को रत्नों से युक्त सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य भी दे दें, तो भी आपको उसे यह ज्ञान नहीं देना चाहिए। किन्तु जो पुरुष अपनी इन्द्रियों को वश में कर चुका है, उसे यह परम ज्ञान अवश्य उपदेश करना चाहिए। ॥37॥
O king! Even if you offer the kingdom of the whole earth filled with gems to a person who has not observed the vows and rules, you should not preach this knowledge to him. But it is undoubtedly appropriate for you to preach this supreme knowledge to a person who has controlled his senses. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥