Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.33: जो असत्यभाषी, कपटी, नीच, कपटी, अपने को विद्वान् समझने वाला और दूसरों को कष्ट देने वाला हो, उसे यह उपदेश नहीं देना चाहिए। मनुष्य को यह ज्ञान किस प्रकार उपदेश करना चाहिए और अवश्य देना चाहिए - यह भी सुनो। 33॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न देयमेतच्च तथानृतात्मने
शठाय क्लीबाय न जिह्मबुद्धये।
न पण्डितज्ञानपरोपतापिने
देयं तु देयं च निबोध यादृशे॥ ३३॥
अनुवाद
जो असत्यभाषी, कपटी, नीच, कपटी, अपने को विद्वान् समझने वाला और दूसरों को कष्ट देने वाला हो, उसे यह उपदेश नहीं देना चाहिए। मनुष्य को यह ज्ञान किस प्रकार उपदेश करना चाहिए और अवश्य देना चाहिए - यह भी सुनो। 33॥
This should not be preached to a person who is untruthful, deceitful, mean, deceitful, who considers himself a scholar and who causes trouble to others. How a man should and must preach this knowledge – listen to this also. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥