Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.308.31: महाराज! मैंने आपके इस शुद्ध, सनातन और आदि ब्रह्मस्वरूप का सच्चा सार, बिना किसी ईर्ष्या या द्वेष के, आपका अभिप्राय समझकर, प्रेमपूर्वक आपसे वर्णन किया है॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.308: क्षर-अक्षर और परमात्म-तत्त्वका वर्णन, जीवके नानात्व और एकत्वका दृष्टान्त, उपदेशके अधिकारी और अनधिकारी तथा इस ज्ञानकी परम्पराको बताते हुए वसिष्ठ-करालजनक-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतावदेतत् कथितं मया ते
तथ्यं महाराज यथार्थतत्त्वम्।
अमत्सरत्वं परिगृह्य चार्थं
सनातनं ब्रह्म विशुद्धमाद्यम्॥ ३१॥
अनुवाद
महाराज! मैंने आपके इस शुद्ध, सनातन और आदि ब्रह्मस्वरूप का सच्चा सार, बिना किसी ईर्ष्या या द्वेष के, आपका अभिप्राय समझकर, प्रेमपूर्वक आपसे वर्णन किया है॥31॥
Maharaj! I have lovingly described to you the true essence of this pure, eternal and primal true form of Brahma, without any jealousy or hatred, and understanding your purpose. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥